Monday, 6 June 2016

०३४ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



लबों को भाता नहीं कोई मधुरस, भाति सागरमय हाला
नहीं सुहाता बर्तन सोने का हाथो को भाता मादक प्याला
चाहे मीना बाजार ही क्यों न हो नहीं भाता परदेशी आला
मेरी पहली और आखिरी ख्वाहिश मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव