Monday, 6 June 2016

०३३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सातो सागर मादक हाला हो जाये अम्बर हो जाये अनुपम प्याला
रूपसी सुरबाला साकी हो और कृतक अंजान डगर सा हो पीनेवाला
थमे न कोमल कर रूपसी सुरबाला के और थके न कृतक पीनेवाला
हरेक सुब हरेक शाम गुंजायमान हो मेरी आधुनिकतम मधुशाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव