Monday, 6 June 2016

०३२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सारे सागर हाला  हो गए चाँदनी बरसाती सागरमय हाला
मेघों  से टपकती अमृतसम अनुपम साकी पिलाती हाला
सावन के मेघो से रिमझिम रिमझिम बरसती मादक हाला
भोर का पक्षी बन कृतक पियु दिव्य  अनुपम मादक हाला

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव