Monday, 6 June 2016

०३१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कृतक अंजान प्रफुल्लित है और प्रफुल्लित रूपसी सुरबाला
प्रफुल्लित है आज फिज़ायें और प्रफुल्लित लगाती है हाला
प्रफुल्लित अम्बर की काली घटाये मेंगो से बरसाती हैं हाला
सागर की मादक मौजो से देखो छलक रही सागरमय हाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव