कभी न करती कंजूसी मुझको देने में सागरमय मादक हाला
जब तक मेरा जी करता पिता रहता हाला मेरी अपनी मधुशाला
चौबीसों घण्टे द्वार खुले ही रहते हैं जब जी करता आता मधुशाला
मेरी मधुशाला के द्वारे दोनों कर जोड़े सदा ही मिलती सुरबाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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