Saturday, 9 July 2016

१७९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जीवब भर मैंने सबसे खुद से प्यार किया रिश्तों का निर्वाह किया
अब जाकर जीवन का आनंद है मैंने पाया जब आया मैं मधुशाला
सभी सुख दुःख भुलाकर आलौकिक आनंद मैंने पाया पीके हाला
रूपसी की मादक सागरमय ने यारों तन मन पर डाला डेरा मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव