Saturday, 9 July 2016

१७८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

२-मेरी आधुनिक मधुशाला

आज पीलादे मुझको रूपसी अपने तन मन की मादक यौवन हाला
कृतक अंजान डगर मस्ती में झूम उठेगा पीके प्रियतम मादक हाला
मेरी पहली पसंद और आखिरी ख्वाहिश मरमरी जिस्म अनुपम हाला
सप्त सुरों की स्वर लाहिरी पर झूम उठेगी मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव