२-मेरी आधुनिक मधुशाला
आज पीलादे मुझको रूपसी अपने तन मन की मादक यौवन हाला
कृतक अंजान डगर मस्ती में झूम उठेगा पीके प्रियतम मादक हाला
मेरी पहली पसंद और आखिरी ख्वाहिश मरमरी जिस्म अनुपम हाला
सप्त सुरों की स्वर लाहिरी पर झूम उठेगी मेरी आधुनिक मधुशाला
आज पीलादे मुझको रूपसी अपने तन मन की मादक यौवन हाला
कृतक अंजान डगर मस्ती में झूम उठेगा पीके प्रियतम मादक हाला
मेरी पहली पसंद और आखिरी ख्वाहिश मरमरी जिस्म अनुपम हाला
सप्त सुरों की स्वर लाहिरी पर झूम उठेगी मेरी आधुनिक मधुशाला
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