Friday, 15 July 2016

तेरे लबों से टपकती मादक हाला

महकता हुये जिस्म मे गुलाब की सी खुमारी है

तनहाईयों के आलम में महकती दुनिया सारी है

अंजली भर पी लेने दे आँखों से टप टप टपकती मादक मय

नशा तेरी लबों से टपकती हाला  का  अमृत जैसा है।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव