Wednesday, 6 July 2016

२३७ - मेरी आधुनिक मधुशाला

२३७  -   मेरी आधुनिक मधुशाला

बरखा की पहली फुहार झूमती गाती आई मेरी मधुशाला
ढोल नगाड़ो और दुंदभी की थाप पर होश उड़ाती मधुशाला
गाज गरजती बिजुरिया चमकती लहराती बल खाती आई
मेरी मधुशाला के चौबारे धूम मचाती हाला बरसाती कारी बिजुरिया 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव