Wednesday, 6 July 2016

१३८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



यह मौलिक कृति हमार मेरे यार मेरी आधुनिक मधुशाला
जैसे बरखा की पहली पहली फुहार बरसत मेरी ;मधुशाला
टप टप टपटप मेघों से टपकती अमृतसम सागरमय हाला
घूम मचाते  रंग जमाते नाना भाँती के मेघ बरसाते हाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव