Wednesday, 6 July 2016

१३९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


नित ही यारो सागरमय है छलकती मेरीआधुनिक मधुशाला
सुदूर ग्रहों से सुर तक आते और सागरमय पाते मेरी मधुशाला
जन्नते हूर साकी बाला बन आती हाला पिलाती मेरी मधुशाला
षोडश बरसी बाला के हुस्न की मानिंद आज दमकती मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव