नित ही यारो सागरमय है छलकती मेरीआधुनिक मधुशाला
सुदूर ग्रहों से सुर तक आते और सागरमय पाते मेरी मधुशाला
जन्नते हूर साकी बाला बन आती हाला पिलाती मेरी मधुशाला
षोडश बरसी बाला के हुस्न की मानिंद आज दमकती मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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