२४० - मेरी आधुनिक मधुशाला
जब कभी परदेशी गुजरता डगर मेरी आधुनिक मधुशाला
जुबां के तन्तु मचलने लगते चखने को मादकतम हाला
कभी न संयम रखने पाता और पहुंचता मेरी मधुशाला
सुरबाला की मादक हाला पीके सारी थकान भुलाता मतवाला
जब कभी परदेशी गुजरता डगर मेरी आधुनिक मधुशाला
जुबां के तन्तु मचलने लगते चखने को मादकतम हाला
कभी न संयम रखने पाता और पहुंचता मेरी मधुशाला
सुरबाला की मादक हाला पीके सारी थकान भुलाता मतवाला
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