Sunday, 17 July 2016

२४० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



दिल की अगन बढाती हाला शांत ना होती अंतर्मन की ज्वाला
कभी न भरता दिल यारों चाहे कितनी ही पी जाऊ मैं हाला
रोज़ उदर में शूल से चुभते चलने को मेरी आधुनिक मधुशाला
दीदारे यार को नज़रे तड़पती हाला पीने को जिव्हा है मचलती 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव