Sunday, 17 July 2016

२३९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


नहीं कभी मन है करता सागरमय अमृत हाला पिनेवाला
आगे बढ़ बाला से परदेशी कहता ला और पिलादे प्याला
प्याले पे प्याला वह पीता जाता अंजान डगर से आनेवाला
धोक लगाता गुण गाता मेरी मधुशाला के चौबारे पीता हाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव