Sunday, 17 July 2016

२४१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



दिल रोज़ मचल उठता चलने को मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी न दिल से ना न निकलती चाहे कितनी भी पियु हाला
नज़रे यौवन रस हाला को मचलती जन्नते हूर रूपसी बाला
मेरी मधुशाला का यौवन है निखरता जब कुहुकती सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव