Sunday, 17 July 2016

२४२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जो भी हाला ख्वाहिश है होती वही हाला मैं पाता मेरी मधुशाला
जन्नते हूर साकी बन आती अपने कोमल कर से थमाती प्याला
दिल के जवां अरमान मचलने लगते देख रूपसी कमसिन बाला
मधुशाला के चौबारे हुजूम सा लगता जब रागनी छेड़ती सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव