Sunday, 17 July 2016

२४३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मेरे हाथ में रोज़ थमाती अनुपम कंचन सैम हाला का प्याला
कभी न प्याला खाली होने  देती भरती जाती प्याले पे प्याला
नज़रे जब कमसिन बाला से टकराती पल में नशा उतर जाता
ख्वाबगाह में स्वप्न लोक में लबों से टप टप टपकती हाला पाता

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव