Sunday, 17 July 2016

२४४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



आज चाँदनी साकी बन अम्बर से आई मेरी आधुनिक मधुशाला
आते ही शबनमी मोतियों की चादर बिछाई और पिलाई हाला
चाँदनी की शबनमी अंजलीभर हाला ने दिल पे जादू कर डाला
अपने सब गिले शिकवे भुला अमृत सोमरस हाला पिलाई मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव