Monday, 18 July 2016

२४५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मेरी मधुशाला की मादक हाला पीके गीत नए गुनगुनाने लगा हु
अंजान डगर का एक परदेशी आसमां के ख्वाब सजाने लगा हुँ
जिस दिन से कमसिन रूपसी का  दीदार किया है मेरे यारो मैंने
अपनी हस्ती को परदेशी अंजान भुलाने लगा हुँ मधुशाला आने लगा हुँ 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव