मेरी मधुशाला की मादक हाला पीके गीत नए गुनगुनाने लगा हु
अंजान डगर का एक परदेशी आसमां के ख्वाब सजाने लगा हुँ
जिस दिन से कमसिन रूपसी का दीदार किया है मेरे यारो मैंने
अपनी हस्ती को परदेशी अंजान भुलाने लगा हुँ मधुशाला आने लगा हुँ
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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