Monday, 18 July 2016

ममता आज पराई हो गई है

कैसे सावन की मादक फुहारों को अल्फाज़ो में सजाउ मैं
कैसे नग्में मोहब्बत और वफाओं के गाऊ मैं
आज सारी कायनातो फिज़ाओ में
नफ़रतो का ज़हर घुल रहा है
कैसे सावन के झूलों में महबूब को झूलाऊ मैं
मेरे वतन का मस्तिष्क काश्मीर सुलग रहा है
वादी की आबो हवाओं में आतंक मचल रहा है
कैसे गीत प्यार के गाउ  में
कैसे केशर की महक से महकती वादी में
हीर रांझणा को एक बार फिर आने को मनाऊ मैं

मेरे वतन के सैनिक जवानों ने जान की बाज़ी
लगाके सैलाब से आदमियत बचाई थी
कैसे भला बात ये भुलाऊ मैं
आज उन्हीं जवानों पर
वादिये काश्मीर में पत्थर बरसाये जा रहे है
जिन्होंने जान की बाज़ी लगाकर जान बचाई
वे अपने ही लहू से नहा रहे है
भला कैसे अपने दिल को आज बहलाउ मैं

आतंकवाद का रावण आज फिर
सीताहरण को बेताब है
भला हो भी क्यों ना
आज घर का भेदी दिग्गी उनके साथ है
आज केजरी टोपी पहन
सबको टोपी पहन रहा है
आज नितिन टोपी लगाके
ध्वज का मजाक बना रहा है

अब भला कैसे तराने अमन के होंगे यहाँ
आज एक बार फिर से घर का भेदी घर गिरा रहा है
उसे चिन्ता नहीं मादरे वतन की यारों
उसी प्रधानी का ख्वाब नज़र आ रहा है
जो कोई आज मादरे वतन पे उँगली उठा रहा है
मोहब्बत दिखा के केजरी नितिन और लालू उसे
माँ का लाल कहकर सहला रहा है

ममता आज पराई हो गई है
पडोसी की लुगाई हो गई है
काले घनियारे शाये में खो गई है
उसकी इंसानियत कही खो गई है
कुर्सी के लालच में वो पराई  हो गई है
आज तुर्की की जनता ने दिखाके हिम्मत
लोकतंत्र बचाया है
मेरे वतन में काफिरों ने आज फिर शत्रु का ध्वज फहराया है
तुम्ही बताओ मेरे यारों
कहा से अलफ़ाज़ मोहब्बत के लाउ मैं
कैसे मादरे वतन की लाज बचाउ मैं
जय हिन्द जय भारत

मनोहर यादव 

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव