सागरमय हाला पीके गुनगुनाने लाहा हुँ
नग्में मोहब्बत के शरेशाम गाने लगा हुँ
तेरी मोहब्बत में आहिस्ता आहिस्ता
सारे जमाने को भुलाने लगा हुँ
ये तो बाला की सागरमय हाला का करम है
रोज़ रोज़ मेरी मधुशाला सनम आने लगा हुँ
अपने दिल में मेरी मोहब्बत को पाने लगा हुँ
सोमरस के हरेक घूंट में यार नज़र आने लगा हुँ
तेरी मोहब्बत के उपवन का माली बन
तेरी महकती बगिया में गुनगुनाने लगा हुँ
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