Monday, 18 July 2016

२४७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जेठ की तपती दोपहर में जन्नत का सा मज़ा पाता मधुशाला
परदेशी जब अंजान डगर चलके आता मेरी आधुनिक मधुशाला
अंगार उगलते सूरज को ठेंगा दिखाता परदेशी पीकर मादक हाला
व्यथित हाँफता परदेशी नग्में मोहब्बत के गाता मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव