Monday, 18 July 2016

२४८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



झूमके झुमके सावन की मादक फुहारे बरस रही मेरी मधुशाला
टप टप टपटप बरस रही घनियारे कारे मेघों से अमृतसम हाला
कृतक तन मन झूम उठा पीकर मेघो से बरसती सागरमय हाला
कारी घटा कुछ ऐसे बरसी तन झूमा मन झूमा झूम उठी सुरबाला

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव