Monday, 4 July 2016

१२२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



रोज़ रोज़ जी भरके पिलाती सागरमय हाला रूपसी बाला
बड़ी मोहब्बत से लबों  से लगाकर मुझको पिलाती हाला
बाला की नाज़ो अदाओं ने दीवाना मुझ परदेशी को बना डाला
रोज़ सांझ ढलते ही मुझे नज़र आती मेरी आधुनिक मधुशाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव