Sunday, 31 July 2016

मेरी मोहब्बत है तू , तू ही मेरा प्यार है , तूही ख्वाहिशे दिल है , सनम एतबार है मुझे

दिल की जवाँ हसरतों को
दफन सीने में करके
करवट बदली मैने
और उसके पैरो में सोने की कोशिश में
करवटें बदलते बदलते
दो पहर रात बीत गई
लघुशंका निवारण हेतु
बाहर निकला बिस्तर से
और दूर उसके बाजू में सो गया
रब दा रहम मैने पाया
मीठे खट्टे ख्वाबों में खो गया
मैने पूछ लिया
आखिर क्यों न वो सब तेरे साथ करू
तेरे साथ मोहब्बत का इझहार करू
तेरे साथ स्वर्णिम पलों को पाऊ
तेरे अनुपम झरनों का जल पाऊ
मै रखवाला तो नही पहरेदार हूँ
अपनी वफाओ से इमानदार हूँ
जाने क्यों तेरी मोहब्बत पाने को दिल बेकरार रहता है
इस बात का एतबार है मुझे
तूही मेरी मोहब्बत है एतबार है मुझे

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