Sunday, 31 July 2016

३१८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मेरे शुरुरे  दिल का राज़ परदेशी गर तुम जान जाओगे
बहुत मिस हमको करोगे मधुशाला को ठिकाना बनाओगे
कभी न दूर जाओगे मोहब्बत में मेरी हरेक रिश्ता भुलाओगे
शमा ए  मधुशाला रौशन करोगे पीके हाला सदा मुस्कुराओगे 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव