ए रूपसी बाला तेरी शबनमी हाला दिलों के होश उड़ाती है
राजा को ये रंक बनाती फ़क़ीर को राजसी ख़्वाब दिखाती है
होश में आने ना देती जन्नत का सा अहसास हाला कराती है
मेरी मधुशाला मेरा ठिकाना रूह रूपसी बाला नज़र आती है
राजा को ये रंक बनाती फ़क़ीर को राजसी ख़्वाब दिखाती है
होश में आने ना देती जन्नत का सा अहसास हाला कराती है
मेरी मधुशाला मेरा ठिकाना रूह रूपसी बाला नज़र आती है
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