Sunday, 31 July 2016

३१७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

ए रूपसी बाला तेरी शबनमी हाला दिलों  के होश उड़ाती है
राजा को ये रंक बनाती फ़क़ीर को राजसी ख़्वाब दिखाती है
होश में आने ना देती जन्नत का सा अहसास हाला कराती है
मेरी मधुशाला मेरा ठिकाना रूह रूपसी बाला नज़र आती है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव