Sunday, 31 July 2016

३१६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मुद्दत की प्यास तेरे लबो के एक शबनमी जाम से बुझाउँगा
वादा करता हूँ जनम जन्मांतरों तक तेरा साथ निभाऊँगा
मेरी थी मेरी है तू मेरी ही रहेगी मरके भी जुदाई सह न पाऊँगा
हरेक रात कब्र से निकल सागरमय जाम पीने मधुशाला आऊँगा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव