मुद्दत की प्यास तेरे लबो के एक शबनमी जाम से बुझाउँगा
वादा करता हूँ जनम जन्मांतरों तक तेरा साथ निभाऊँगा
मेरी थी मेरी है तू मेरी ही रहेगी मरके भी जुदाई सह न पाऊँगा
हरेक रात कब्र से निकल सागरमय जाम पीने मधुशाला आऊँगा
वादा करता हूँ जनम जन्मांतरों तक तेरा साथ निभाऊँगा
मेरी थी मेरी है तू मेरी ही रहेगी मरके भी जुदाई सह न पाऊँगा
हरेक रात कब्र से निकल सागरमय जाम पीने मधुशाला आऊँगा
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