Wednesday, 13 July 2016

२०८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जब मौत मुझे आये टपका देना मुंह में अंजली भर हाला
मेरे लबों  को छुआ भर देना कोमल कर से अनुपम प्याला
एक यही अन्तिम आरज़ू जिन्दगानी की यारों हमारी है
सागरमय बसती नस नस में सुरबाला हमें जान से प्यारी है 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव