जब मौत मुझे आये टपका देना मुंह में अंजली भर हाला
मेरे लबों को छुआ भर देना कोमल कर से अनुपम प्याला
एक यही अन्तिम आरज़ू जिन्दगानी की यारों हमारी है
सागरमय बसती नस नस में सुरबाला हमें जान से प्यारी है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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