Wednesday, 6 July 2016

१४५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


चारों धाम लुभाते थे कभी कलयुग में लुभाती मेरी मधुशाला
धर्म स्थलों को छोड़ सभी जन आजकल आते मेरी मधुशाला
जन्नते हूर सुरबाला हुई पुज्या सबको पिलाती मादक हाला
सारे निकट सम्बन्धी  भुलाकर परदेशी नित आता मधुशाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव