२४६ - मेरी आधुनिक मधुशाला
सुर असुर सोमरस पीते थे हम कलयुग में उसको कहते हाला
इन्द्रसभा जिसे कहते थे आज वही कहलाती मेरी मधुशाला
रम्भा सैम स्वर्ग सुंदरी अप्सरायें आज कहलाती रूपसी बाला
पूज्य स्थल जहाँ बसते थे देव कभी कलयुग में कहलाते मदिराला
सुर असुर सोमरस पीते थे हम कलयुग में उसको कहते हाला
इन्द्रसभा जिसे कहते थे आज वही कहलाती मेरी मधुशाला
रम्भा सैम स्वर्ग सुंदरी अप्सरायें आज कहलाती रूपसी बाला
पूज्य स्थल जहाँ बसते थे देव कभी कलयुग में कहलाते मदिराला
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