२३१ - मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरी पहली मोहब्बत पावन जैसे मेरी आधुनिक मधुशाला
सागरमय पीके रूह तक मचल जाती पीने को मादक हाला
हाला की मोहब्बत से सदियों तक जुड़ा रहता पीने वाला
जब जी में आता अंजान पथिक चलता पहुंचता मेरी मधुशाला
मेरी पहली मोहब्बत पावन जैसे मेरी आधुनिक मधुशाला
सागरमय पीके रूह तक मचल जाती पीने को मादक हाला
हाला की मोहब्बत से सदियों तक जुड़ा रहता पीने वाला
जब जी में आता अंजान पथिक चलता पहुंचता मेरी मधुशाला
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