Wednesday, 6 July 2016

१३० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मेरी आधुनिक मधुशाला जाने को नित ही निकालता पीने वाला
अपने आप डगर चलता मनिल पाता हाला पीता मेरी मधुशाला
अलग अलग पथ अलग  मंजिल ले जाते भरमाते अंजान पथिक
हरेक राह और डगर पकड़ परदेशी आता मंजिल पाता मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव