Sunday, 10 July 2016

१८७- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कुछ लोग है पीते जीने को हाला कुछ लोगों को पी जाती है हाला 
मेरी मधुशाला की मादक हाला ने लोगों का अंदाज बदल डाला 
नगर में नित मेला लगता डगर डगर परदेशी आता झूमता गाता 
कभी कभी डेरा भी जमाता सबको भुलाता पीटा सागरमय हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव