Sunday, 10 July 2016

१८८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


अपनी मेहनत की दिन भर की कमाई हाला में अंजान गंवाता
खुद को करता सागरमय के हवाले और रिश्तों को धूल चटाता
सारी जिन्दगी यु ही बिताता अंत समय जब यम आता पछताता
पत्नि बच्चों रिश्तों को छोड़ बिलखता याम के संग कूच कर जाता 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव