अपनी मेहनत की दिन भर की कमाई हाला में अंजान गंवाता
खुद को करता सागरमय के हवाले और रिश्तों को धूल चटाता
सारी जिन्दगी यु ही बिताता अंत समय जब यम आता पछताता
पत्नि बच्चों रिश्तों को छोड़ बिलखता याम के संग कूच कर जाता
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment