Sunday, 10 July 2016

१८९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



ग़मज़दा लबों  पे मुस्कान बिखेरती अंजली भर मादक हाला
दिल बाग़ बाग़ हो जाता खुद को जन्नत में पाता पीनेवाला
सारी दुनियाँ से अलग एक नई आला दुनियाँ में खुद को पाता
मेरी मधुशाला के चौबारे से सारी डगर जश्न मनाता पीटा हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव