Sunday, 10 July 2016

१९० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



दुःख भरी जिन्दगानी को भुलाती अंजली भर अमृतसम हाला
लबों को खुशियाँ दे जाता सुरबाला का दिव्य अनुपम प्याला
भला कैसे परदेशी अंजान डगर भुलाता सागरमय मादक हाला
साँझ ढले गगन तले दिल फिर कहता आ चले मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव