Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा,
चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 10 July 2016
१९० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दुःख भरी जिन्दगानी को भुलाती अंजली भर अमृतसम हाला
लबों को खुशियाँ दे जाता सुरबाला का दिव्य अनुपम प्याला
भला कैसे परदेशी अंजान डगर भुलाता सागरमय मादक हाला
साँझ ढले गगन तले दिल फिर कहता आ चले मेरी मधुशाला
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