Sunday, 10 July 2016

१८६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मेरे सभी मित्रों को भाती बाला की अनुपम सागरमय मादक हाला
रूपसी की अनुपम सागरमय ने सभी मित्रों को दीवाना बना डाला
सभी के संग महफ़िल  जमती जन्नत का सा सुख देती मधुशाला
जैसे जैसे निशा यौवन पे आती स्वर लहरी गूँजती दौड़ती हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव