Sunday, 10 July 2016

१८५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



बाला की मादक अंगूरी हाला ने तन मन तक को हिला डाला
कभी न बुझती प्यास नज़र आती रूपसी और मेरी मधुशाला
हर पल यही दिल में आता कभी न छोड़ू मैं अपनी मधुशाला
ता उम्र धुनि रमाउ और कीर्ती गाउ हाला और रूपसी बाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव