Saturday, 9 July 2016

१७१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



अपने छोटे से जीवन में मैंने अब तलक पी डाली टनो से हाला
आधा जीवन अंजान डगर पे बीता और आधा मेरी मधुशाला
जहाँ में आने वाला हरेक कहलाताह एक न एक दिन जानेवाला
सदियों से मधुशाला आज तलक कायम नित बदलता पीनेवाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव