Saturday, 9 July 2016

२७२ - मेरी आधुनिक मधुशाला

२७२  -  मेरी आधुनिक मधुशाला

नहीं दिल अब भरने वाला पीकर अंजली भर सागरमय हाला
कैसा तुम्हे मज़ाक आज़ सुझा इ कमसिन अल्हड सुरबाला
क्या तुम भूल गई मुझकों मेरा जीवन सांसे मादक प्याला
मेरी नस नस में सागरमय दौड़ रही जिंदगी मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव