२७२ - मेरी आधुनिक मधुशाला
नहीं दिल अब भरने वाला पीकर अंजली भर सागरमय हाला
कैसा तुम्हे मज़ाक आज़ सुझा इ कमसिन अल्हड सुरबाला
क्या तुम भूल गई मुझकों मेरा जीवन सांसे मादक प्याला
मेरी नस नस में सागरमय दौड़ रही जिंदगी मेरी मधुशाला
नहीं दिल अब भरने वाला पीकर अंजली भर सागरमय हाला
कैसा तुम्हे मज़ाक आज़ सुझा इ कमसिन अल्हड सुरबाला
क्या तुम भूल गई मुझकों मेरा जीवन सांसे मादक प्याला
मेरी नस नस में सागरमय दौड़ रही जिंदगी मेरी मधुशाला
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