Sunday, 10 July 2016

१९५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



निस दिन जुबा को भाती बाला की अमृतसम मादक हाला
साँझ ढले नित सही समय परदेशी है आता मेरी मधुशाला
दिल भरके फिर सागरमय पीता मेरी आधुनिक मधुशाला
भोर भये मधुशाला से निकालता और अपनी मंजिल पाता


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव