Sunday, 10 July 2016

१९४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



 सारी की सारी कड़वाहट है भुलाता जब परदेशी पी लेता हाला
अमृतसम मिठास लबों पर आती जब अंदर जाती मादक हाला
रूपसी कमसिन विश्वमोहिनी सबका दिल हर लेती पिलाके हाला
मेरा मधुशाला सबको प्रिय लगती दिल जीत लेती कमसिन बाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव