Sunday, 10 July 2016

१९६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


हरेक शाम सुहानी सी लगती है आकर मेरी आधुनिक मधुशाला
जिन्दगानी जानी पहिचानी सी लगती है पीकर सागरमय हाला
जन्नते हूर रम्भा से भी सुन्दर दिल को भाती कमसिन बाला
दिल प्रफुल्लित है हो जाता जब जी भरके पीता अमृतसम हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव