Sunday, 10 July 2016

१९७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कभी तो याम आयेगा बन साकी मेरी आधुनिक मधुशाला
उसके नाल मिल बैठ के यारों हम पियेंगे अमृतसम हाला
याम संग यारी परवान चढ़ेगी यम अपना कर्तव्य भुलायेगा
यारी के चलते हमें छोड़ मेरी मधुशाला वापस लौट जायेगा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव