तेरे मयखाने में शुकून दिल को आता है पीके तेरे लबो से छलकती हाला
मैं परदेशी अंजान डगर नित सरेशाम आ जाता हुँ मेरी आधुनिक मधुशाला
बस यही ख्वाहिशें दिल है रूपसी इतनी पिला मुझे की होश में न आउ बाला
गेम दिलो को भुलाने के लिए मई परदेशी रोज़ ही आता मेरी मधुशाला
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