Monday, 25 July 2016

२९१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

जब कभी तेरे मयखाने आउ लबो से लगकर साकी तुझे ही पी जाऊ 
छलकते जाम की मानिंद हो तुम सर से पाँव तलक मादक जाम हो तुम 
तेरे नज़रो से छलकते है जाम यार मेरे पीने को परदेशी रहता तैयार 
मेरी मधुशाला से मोहब्बत दीवानगी की हद हाला की चाहत जिंदगी की ललक 


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव