Monday, 25 July 2016

२९२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

तेरी नज़रो से टप टप टपकती सागरमय पीने मेरी मधुशाला आया
परदेशी अनजान डगर मनोहर दीदारे यार की खातिर मदिना आया
तुझसे मोहब्बत भी नशा के ए सागरमय से कम  नहीं यार होती है
जब तेरा दीदार होता है सहराओं में जिंदगी गुलज़ार मेरे यार होती है 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव