Thursday, 14 July 2016

२१४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



नहीं जलाना लकड़ीयो में मुझकों नहीं तेल या गहि में आला
एक यहीं ख्वाहिश मेरी मुझे जलाना पिलाके सागरमय हाला
मेरी समाधी यारो बनाना सम्मुख मेरी आधुनिक मधुशाला
बाद मौत के भी आठों  पहर महकती रहेगी रूह महक से हाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव