नहीं जलाना लकड़ीयो में मुझकों नहीं तेल या गहि में आला
एक यहीं ख्वाहिश मेरी मुझे जलाना पिलाके सागरमय हाला
मेरी समाधी यारो बनाना सम्मुख मेरी आधुनिक मधुशाला
बाद मौत के भी आठों पहर महकती रहेगी रूह महक से हाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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