Monday, 25 July 2016

२९६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



लब मिला दिए रूपसी कमसिन बाला ने मेरे लबो से ये कहकर 
गर मादक मय  पीना छोड़ दोगे तो ये अंगूरी जाम रोज़ पाओगें 
दिल में खुशियों का सैलाभ आयेगा जिन्दगी खुशहाल बिताओगे 
मधुशाला हरेक डगर तुम पाओगे मादक मय पीके होश में आओगे 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव